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“Random-thoughts”


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“साँस”

सुनो! अपनी साँसे ग़ज़ल कह रही है

तुम्हारी लबो पर जमी एक चॉकलेट
मेरे गाल से आके कुछ कह रही है

ज़माना जिन्हें लोथड़े कह रहा है
मैं चूमता हूँ तो दुआ मिल रही है

मुझे चाहते थी जहाँ भीगने की
उसी झील में फिर पनाह मिल रही है

पीपल के पत्ते सा नाज़ुक है हिस्सा
मेरी उंगलिया भी वहीँ ढल रही है

मेरे जिस्म की कोई पत्थर सी मिट्टी
तेरे नर्म चूल्हे में गज़ब जल रही है

मेरी रूह ने फिर कसम तोड़ दी है
किस्मत से नीयत की जंग चल रही है

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“Random-thoughts”

1.

तन के घर में सांस का चूल्हा
थोड़ा जलता थोड़ा बुझता
ले आओ तुम नेह की फुँकनी
मारो फूंक लबों के द्वारे
मैं जी जाऊं या मर जाऊं
तेरी चाहत,मेरी किस्मत

2.

एक तू ही है जिसने तोहफे में मुझे माँगा है
हुस्न वाले तो यहाँ ताजमहल मांगते है

हाथ दुखते है पांव में छाले ,सांस भारी है
मेरे सितारे मगर अब भी सफर मांगते है

पत्थरो को पूजना तो चाहता हूँ मगर डरता हूँ
ये पत्थर भी मुझमे एक सच्चा बशर मांगते है

“Deepawali ki dhero shubhkamnaye”

“Happy deewali”