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“साँस”

सुनो! अपनी साँसे ग़ज़ल कह रही है

तुम्हारी लबो पर जमी एक चॉकलेट
मेरे गाल से आके कुछ कह रही है

ज़माना जिन्हें लोथड़े कह रहा है
मैं चूमता हूँ तो दुआ मिल रही है

मुझे चाहते थी जहाँ भीगने की
उसी झील में फिर पनाह मिल रही है

पीपल के पत्ते सा नाज़ुक है हिस्सा
मेरी उंगलिया भी वहीँ ढल रही है

मेरे जिस्म की कोई पत्थर सी मिट्टी
तेरे नर्म चूल्हे में गज़ब जल रही है

मेरी रूह ने फिर कसम तोड़ दी है
किस्मत से नीयत की जंग चल रही है

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“Random-thoughts”

1.

तन के घर में सांस का चूल्हा
थोड़ा जलता थोड़ा बुझता
ले आओ तुम नेह की फुँकनी
मारो फूंक लबों के द्वारे
मैं जी जाऊं या मर जाऊं
तेरी चाहत,मेरी किस्मत

2.

एक तू ही है जिसने तोहफे में मुझे माँगा है
हुस्न वाले तो यहाँ ताजमहल मांगते है

हाथ दुखते है पांव में छाले ,सांस भारी है
मेरे सितारे मगर अब भी सफर मांगते है

पत्थरो को पूजना तो चाहता हूँ मगर डरता हूँ
ये पत्थर भी मुझमे एक सच्चा बशर मांगते है

“Deepawali ki dhero shubhkamnaye”

“Happy deewali”

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“स्वार्थ”

एक वेदपाठी ब्राह्मण के चार बेटे थे।ब्राह्मण चारो बेटो से समान व्यवहार करता,लेकिन उसका सबसे छोटा बेटा उद्दंड था उसको छोटा कहलाना पसंद  न था वो हर बात में बड़े भाइयों का मुंह बंद करने की और कई बार खुदको उनसे भी बड़ा साबित करने की कोशिश करता।एक दिन उनके घर में उनके कुछ रिश्तेदार आये और लौटते वक्त मेहमानों ने ब्राह्मण के चारो बेटो को उपहार स्वरुप कुछ देना तय किया।उन्होंने चारो को आवाज दी, बड़े तीनो बेटे बड़ी शालीनता के साथ मेहमानों के पास आकर खड़े हुए लेकिन चौथा बेटा वहाँ आया भी नहीं और पूरी अकड़ के साथ दूर बैठा रहा तभी आगत में से एक ने तीनो भाइयों को कहाँ की तुम्हारा चौथा भाई कौन है और कहाँ है उसे बुलाओ हम उसके लिए सबसे सुंदर और महंगा उपहार लाये है ये बात जब चौथे के कानों में पड़ी तो वो महज कच्छे में भागता हुआ मेहमानों के सामने आया और बोला “मैं ही हूँ छोटा लाइए मेरा उपहार”
“मैं ही हूँ छोटा लाइए मेरा उपहार”
ये मेरा हक़ है मैं इसे जाने नहीं दूंगा।
व्राह्मण और उसके तीनो बेटे ये देखकर हैरान थे खुदको छोटा न बोलने की जिद करने वाला घर का सबसे शरारती बच्चा कैसे स्वार्थ होने पर खुदको सबसे छोटा साबित करने में लगा है।
😂😂😂😂
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“Random-Thoughts”

1.
बात भी आधी-अधूरी हो गयी
सामने रह के भी दुरी हो गयी

मैं फकत उम्मीद पे जीता रहा
ज़िन्दगी सदमों में पुरी हो गयी

खून पे भी अब भरोसा न रहा
खून की रंगत भी भूरी हो गयी

साक़िया तेरी ही सूरत है दवा

धड़कनो को ‘मय’ जरूरी हो गयी
2.
पत्थरों से पूछता है आजकल
किस तरह खुशियां मिलेगी जान को
जानते पत्थर अगर सुख बाँटना
जान दे देते ना खुदकी जान को
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“Random-thoughts”

1.

पत्थरों! चलो,
तुम्हें लेने को आया हूँ
डरो मत,तुम्हे मंदिर में नहीं
घर की नींव में जगह दूँगा
तुम मेरी उम्मीद हो
और मैं तुम्हारा आसरा
वफादारी रखोगे तो
तुम्हें हर चीज में जगह दूँगा
पत्थरो!चलो,
तुम्हें लेने को आया हूँ

2.

पगली तुझको प्रीत पुकारे, सावन का संगीत पुकारे
वो शिव की पूजा का फल है तेरी हर उलझन का हल है
तुझको मन का मीत पुकारे

झूठा-सच्चा कब जानेगी,अपने मन की कब मानेगी
क्यूँ खुद से ही हार रही है,तुझको जग की जीत पुकारे
पगली तुझको प्रीत पुकारे