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ERotica

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P.c.=Google

तन का भारीपन गर हमको कम करना है
आओ तुम मेरे सीने के रस्ते पर टहलो
और मैं तेरी छतियां पे दौड़ लगाता हूँ

यूँ करते है हम दोनों पत्थर हो जाते है
घिस घिस कर वो आग जमाने को देंगे
जल जाएगा बैर बचेगा “इश्क” फकत

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“Suicide-Story”

पहले तो बस आँख मिली थी
आँख मिली और बात बढ़ी
बात बढ़ी और इश्क हुआ
इश्क हुआ फिर रात हुई
रात हुई दो जिस्म मिले
जिस्म मिले एक जान हुए
वो जान हुए पहचान गए
पहचान गए के सच क्या है
सच ये है दोनों झूठे थे
झूठे जो खुद से गाफिल थे
गाफिल ऐसे जो बहक गए
बहके ऐसे के फिसले थे
फिसले थे तन की घाटी से
घाटी से दरिया में डूबे
डूबे तो ये मालूम हुआ
मालूम हुआ वो इश्क नहीं
वो इश्क नहीं वो लालच थी
लालच थी के कुछ छूना था
जो छुना था वो माटी थी
माटी में भी एक मंदिर था
मंदिर छूते तो अच्छा था
फिर अच्छाई का भरम गया
जब भरम गया तो जान गए
जान गए के गलत हुआ
और फिर गलती से “जान” गयी

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“जवानी”

मैं अक्सर पूछता हूँ सबसे के जवानी क्या है
जवानी जज्ब का तूफ़ान है या आँधियों का घर
जवानी चूमने की प्यास है या बैर का खंजर
जवानी जख्म है,मलहम है या मर्ज है कोई
जवानी आस है,अहसास है या दर्द है कोई
तुम्हारे साथ कटती है जो क्या वो ही जवानी है
या मेरी माँ की उम्मीदे है या उसकी आँख का पानी
बहुत मगरूर हूँ इसपे मुझे मालुम है लेकिन
के कट जायेगी ये भी जैसे कट गया बचपन
बहुत नादान हूँ मैं यूँ तो,पर समझ में ये ही आता है
जवानी ज़िन्दगी के कैमरे की एक फ़िल्म है शायद
जब सोया रहूँगा मैं बुढ़ापे में बीमारी से
मेरी याद के थिएटर में ये देखा करूँगा रोज
मैं तुम्हारा ‘हीरो’ तुम मेरी ‘हिरोइन’
हमारे माँ-बाप  और कुछ अपने
सभी अच्छे ही तो थे उसमे
और हाँ ये जमाना
ये “विलेन” था पहले भी
ये आज भी “विलेन” है

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🙏🙏

और अब कुछ दिनों या शायद महिनो के लिए wordpress से छुट्टियां ले रहा है,एक सफ़र में हूँ अब मंजिल मिलने के बाद ही लौटूँगा।😊😊

बहुत सी खूबसूरत रचनाएँ ले कर लौटूँगा।

“स्वस्ति”

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“खूँ”

तुम्हारे जिस्म के कुछ एक हिस्से
तुम्हे मालूम हैं क्यूँकर गुलाबी?
तुम्हारे नूर के पौधे की खातिर
मैंने उनके जरिये “खूँ” दिया है

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सुनो!

सुनो!
मैं अब आज़ाद होना चाहता हूँ
तुम अपने बदन मैं कैद कर लो

मैं अब खामोश होना चाहता हूँ
तुम अपने लबो का शोर दे दो

मैं अब राख होना चाहता हूँ
तुम अपने तले की आग दे दो

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“Revenge”

Girl,are you talking about
“revenge” of our past?
Okay,
Let’s start with kisses”

तुम्हारा होंठो पे दबे पड़े है बीसियों शिकवे
हो इज़ाज़त अगर
तो अपने होंठो से
तुम्हारे चन्द शिकवे कुरेद लूँ