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“साझा दर्द”

आज पहली बार संजय की निजी दराजो को लता साफ़ कर रही है। शादी को 15 साल हो गए लेकिन इन दराजो को सिर्फ संजय ही सम्हालता है।
“प्यारी निशा”!!! लता के हाथ में संजय का एक बड़े करीने से छिपाया हुआ ख़त है…ये निशा कौन है??
इससे पहले कभी ये नाम नहीं सुना।लता धीमे-धीमे ख़त को पढ़ती जा रही है उसको आँखों में दर्द और गुस्से का सैलाब उतर रहा है।
लता ने ठान लिया है आज कुछ भी हो जाए संजय के ऑफिस से आते ही उन्हें निशा के बारे में पूछना है।
हाय डार्लिंग!संजय ने ऑफिस से आते ही लता को पुचकारा
ये निशा कौन है??? बिना किसी भूमिका के लता ने सीधा सवाल दागा।
नि नि नि निशा, कौन निशा? संजय हड़बड़ाते हुए बोला।
वहीं निशा जिसके नाम का ख़त तुम्हारी दराज से मिला है।
संजय को लगा मानो किसी ने बरसो पुराना जख्म कुरेद दिया हो मगर फिर भी पूरी हिम्मत के साथ उसने लता को बिठाया और उसकी गोदी में जोर से सुबक पड़ा..
निशा संजय के पड़ोस में रहने वाले जैन परिवार की एक लड़की थी जिसे संजय जी जान से चाहता था।सामजिक मर्यादाओ और पारिवारिक बंधनो के कारण वो निशा से अपने मन की बात भी नहीं कह पाया।वो ख़त संजय निशा को देना चाहता था मगर उसकी शादी तय हो गयी और ख़त कुंवारा ही रह गया।
“हा हा हा हा”लता जोरो से हंसी, संजय को उसका हंसना अखरा मगर फिर भी उसने धीमे स्वर में लता से कहा “मुझे माफ़ कर दो”
लता ने संजय का हाथ पकड़ा और उसे उनके बेडरूम में ले गयी।संजय के सामने उसने वो सन्दूक खोला जो शादी के वक्त उसके पीहर की तरफ से दिया था।उस संदूक में लता के सभी रिश्तेदारो और सहेलियों के तोहफे थे उन तोहफों में से लता ने चूड़ियों का एक सेट और राधाकृष्ण की तस्वीर निकाली।
“तुम जानते हो ये तोहफे मुझे किसने दिए है! संजय?”
लता बड़बड़ाई
संजय ने नकारते हुए अपनी गर्दन हिलाई।
आँखों में एक अलग ही चमक के साथ लता बोली “रमन ने”
हमारी क्लास का सबसे होशियार और सबसे खूबसूरत लड़का था, वो मुझे बहुत चाहता था और मैं भी दिल ही दिल में उसे प्यार करती थीं मगर ना कभी उसने इज़हार किया न मैंने। दोस्त होने के नाते उसने मुझे बीसियो तोहफे भेजे उन्ही तोहफों को अपनी संदूक में समेटकर में अपने साथ ले आयी और तुमसे झूठ कहा की ये तोहफे मुझे सहेलियों ने दिए है।

इस बार गुस्सा होने की बारी संजय की थी मगर न जाने क्यों संजय को गुस्सा नहीं लता पर बहुत सारा प्यार आ रहा था वो उठा और उसने लता को कुछ् इस तरह गले लगाया की जैसे वो अब कभी उसे खोना नहीं चाहता।दोनों की आँखों से आंसू कुछ इस तरह बह रहे थे है मानो पश्चाताप,पीड़ा और प्यार तीनों ने एक ही रस्ते से निकलना तय किया हो।

संजय,लता को आज के बाद कभी न दिल दुखाने का वादा दे रहा था और लता संजय के सीने से चिपटी उसे कभी न छोड़ने की गुजारिश कर रही थी।
15 सालो में पहली बार दोनों ने एकदूसरे पे  इतना प्यार उड़ेला था और आखिर करते भी क्यों न दोनों का दर्द भी तो साझा था।
” ज़िन्दगी जैसी भी है निभाने के लिए है”

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