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“अपना रिश्ता”

“अपना रिश्ता” टूटे तो इस तरह के

टूटकर भी कोई वास्ता रहे हम में

“अपना रिश्ता” टूटे तो इस तरह के

मैं किसी मछली की तरह तुमसे बिछ्डुं तो मर जाऊँ

तुम किसी नदी की तरह फिर भी मगर बहती रहो

तुमसे कोई कतरा भी अगर मांगे तो तुम उसे तर कर दो

तुम किसी पोखर में मिलो और उसको समंदर कर दो

उम्रभर फिर भी रहे मुझसे बेरुखी का रंज तुम में

“अपना रिश्ता” टूटे तो इस तरह के

टूटकर भी कोई वास्ता रहे हम में

“अपना रिश्ता” टूटे तो इस तरह के

मैं तुम्हारी चाहत की हथेलियों से रेत सा फिसलूँ

फिर इन हथेलियों को चाहे कोई भी जवाहरात सजाएं

बची रहे यादों की नर्म पोरों में मेरी खुरदुराहट

“अपना रिश्ता” टूटे तो इस तरह टूटे

के टूटकर भी कोई वास्ता रहे हम मेंimg_20160722_084947

 

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